यह बात मैं आज भी किसी को ठीक से बता नहीं पाता।
क्योंकि जब भी “Tuesday” का नाम आता है, मुझे उस अस्पताल की गंध महसूस होने लगती है।
यह कहानी मेरे साथ सीधे नहीं हुई…
लेकिन मेरे अपने घर के एक सदस्य ने जो देखा, उसके बाद हमारे परिवार में कोई भी मंगलवार को अस्पताल का नाम नहीं लेता।
अगर आपको लगता है कि मौत अचानक होती है…
तो शायद आपने Ward नंबर 7 के बारे में नहीं सुना।
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| जहाँ खामोशी भी कुछ छुपा रही हो, वहाँ कहानी की पहली साँस डर से भरी होती है। |
मेरा बड़ा भाई, अमित, शहर के एक सरकारी अस्पताल में स्टाफ नर्स था।
सरल स्वभाव, काम से काम रखने वाला इंसान।
उसने कभी भूत-प्रेत जैसी बातों पर भरोसा नहीं किया।
अस्पताल भी सामान्य था।
दिन में शोर, रिश्तेदारों की भीड़, स्ट्रेचर की आवाज़ें।
रात में मशीनों की लगातार बीप… और दवाइयों की तीखी गंध।
अमित की ड्यूटी ज़्यादातर Ward नंबर 7 में लगती थी।
एक पुराना वार्ड, लेकिन चालू।
पहले कुछ महीनों तक सब ठीक रहा।
फिर एक दिन उसने घर आकर यूँ ही कहा—
“अजीब बात है… Tuesday को इस वार्ड में माहौल अलग हो जाता है।”
हमने ध्यान नहीं दिया।
लेकिन फिर यह बात हर हफ्ते दोहराई जाने लगी।
हर Tuesday रात को Ward 7 में ठंड ज़्यादा लगने लगती
मरीज बिना वजह बेचैन हो जाते
Heart monitor एक पल के लिए same tone में अटक जाता
और ठीक रात 3:15 से 3:35 के बीच कुछ न कुछ गड़बड़ होती
पहले डॉक्टर कहते—
“Critical patients हैं, coincidence है।”
अमित भी यही मानता रहा।
लेकिन दिक्कत यह थी कि
👉 हर Tuesday कोई न कोई मर ही जाता था।
बुधवार, गुरुवार, शुक्रवार— कुछ नहीं।
सिर्फ़ Tuesday।
🔸
एक Tuesday अमित ने मुझे फोन किया।
आवाज़ अजीब तरह से धीमी थी।
“आज फिर वही हुआ,” उसने कहा।
“Bed नंबर 4… बिल्कुल stable था।
और 3:32पर… सब खत्म।”
मैंने पूछा—
“शायद हालत बिगड़ गई होगी?”
उसने जवाब नहीं दिया।
बस इतना बोला—
“अगर तुम यहाँ होते… तो तुम्हें भी अजीब लगता।”
उस रात के बाद उसने Tuesday को ड्यूटी बदलवाने की कोशिश की।
लेकिन हर बार किसी न किसी वजह से वही वार्ड मिल जाता।
जैसे…
कोई नहीं चाहता था कि वह वहाँ से जाए।
एक Tuesday, Ward में एक बुज़ुर्ग मरीज भर्ती हुआ।
हालत stable थी।
Doctor ने खुद कहा—
“24 घंटे में discharge.”
अमित निश्चिंत था।
रात 3:16 AM
सब सामान्य।
3:32AM
Ward की tube-light एक सेकंड के लिए flicker हुई।
अमित ने बताया—
उसी पल उसे लगा जैसे
किसी ने उसके कान के पास साँस ली।
वह पलटकर Bed नंबर 7 की तरफ देखता है।
वहाँ…
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| जब डर महसूस नहीं, बल्कि दिखाई देने लगे — तब समझो सच सामने आ चुका है। |
👉 कोई खड़ा था।
न पूरा इंसान,
न पूरा साया।
अमित की टाँगें सुन्न हो गईं।
अगले ही पल—
Heart monitor flat।
मरीज मर चुका था।
🔸 सन्नाटा
अगले दिन अमित ने हिम्मत करके
CCTV footage देखी।
Ward खाली दिख रहा था।
लेकिन ठीक 3:32 AM पर
Screen में एक dark shape उभरी।
कोई इंसानी चाल नहीं।
कोई साफ़ चेहरा नहीं।
बस…
एक मौजूदगी।
Footage वहीं glitch होकर रुक जाती है।
Hospital records खंगाले गए।
👉 पिछले 12 सालों में
👉 हर Tuesday
👉 Ward नंबर 7 में
👉 कम से कम एक मौत
चाहे मरीज मामूली ही क्यों न हो।
यह अब coincidence नहीं था।
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| कुछ कहानियाँ खत्म नहीं होतीं… वो बस 3:17 पर दोबारा कॉल करती हैं। |
अमित ने अगले Tuesday से नौकरी छोड़ दी।
पूरी तरह।
हम सबने राहत की साँस ली।
लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं हुई।
पिछले Tuesday रात
3:32 AM पर
अमित के फोन पर एक missed call आई।
Number private था।
Call log में सिर्फ़ एक नाम लिखा था—
“Ward 7”
आज अमित किसी से बात नहीं करता।
Tuesday को कमरे से बाहर नहीं निकलता।
और कभी-कभी
वह नींद में बस एक ही बात बुदबुदाता है—
“मैं वहाँ नहीं था…
तो फिर मुझे क्यों बुलाया?”
❓ Tum hote to kya karte?
❓ Kya 12 saalon tak har Tuesday ek hi ward me maut sirf coincidence ho sakti hai?
👇 Comment karke बताओ…
क्योंकि कुछ जगहें
छोड़ देने से नहीं…
छोड़ने नहीं देतीं। 😈









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