उस गांव की हवा में एक अजीब सी शांति थी…
वो शांति, जो पहली नज़र में सुकून देती है… लेकिन थोड़ी देर बाद बेचैन करने लगती है।
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| गांव के बीच खड़ा यह पिंपल का पेड़ दिन में साधारण लगता है… लेकिन रात में इसके आसपास कुछ बदल जाता है। |
रात का समय था।
दूर कहीं कुत्ते भौंक रहे थे… और खेतों के बीच से आती हवा सूखी घास को हिलाते हुए एक सरसराहट पैदा कर रही थी।
गांव के बीचों-बीच एक पुराना पिंपल का पेड़ खड़ा था।
बहुत पुराना।
इतना पुराना कि गांव के सबसे बूढ़े आदमी ने भी उसे जन्म से वहीं देखा था।
उस पेड़ के पास से कोई रात में नहीं गुजरता था।
राहुल शहर से अपने दोस्त विकास के गांव आया था।
उसे गांव, शांति और थोड़ी अलग दुनिया देखने का शौक था।
“यहां तो सब कुछ शांत है यार… कोई टेंशन ही नहीं,”
राहुल ने मुस्कुराते हुए कहा।
विकास ने हल्की सी नज़र उठाई…
और बस इतना बोला—
“दिन में…”
राहुल हंसा—
“मतलब? रात में क्या होता है?”
विकास ने जवाब नहीं दिया।
बस खिड़की से बाहर देखने लगा…
जहां दूर… धुंध के बीच… वही पिंपल का पेड़ दिख रहा था।
उस रात राहुल को नींद नहीं आ रही थी।
गांव की खामोशी उसके लिए नई थी…
इतनी खामोशी कि खुद की सांसें भी भारी लगने लगीं।
तभी…
टक… टक…
खिड़की पर हल्की सी आवाज़ हुई।
राहुल उठा।
जैसे कोई खिड़की के पास खड़ा आप कटा रहा हो।
लेकिन जैसे ही राहुल ने खिड़की खोली…
बाहर कोई नहीं था।
सब कुछ बिल्कुल स्थिर।
पर दूर… उसी पेड़ के पास…
उसे ऐसा लगा जैसे कोई खड़ा है।
सफेद… धुंधला…
लेकिन इंसान जैसा।
उसने पलक झपकी…
और वो गायब हो गया।
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| जब उसने खिड़की से बाहर देखा… तो उसे एहसास हुआ कि वो अकेला नहीं है। |
सुबह राहुल ने ये बात विकास को बताई।
विकास का चेहरा पल भर को बदल गया…
लेकिन उसने खुद को संभाल लिया।
“तू रात में बाहर मत निकलना,” उसने धीमे से कहा।
“क्यों?” राहुल ने हंसते हुए पूछा।
विकास कुछ सेकंड चुप रहा…
फिर बोला—
“10 साल पहले… उस पेड़ के नीचे एक लड़की मिली थी।”
“मरी हुई?”
“नहीं…”
विकास की आवाज़ धीमी हो गई—
“जिंदा थी… लेकिन उसकी आंखें…”
“क्या हुआ था आंखों को?”
“वो किसी को देख रही थी… जैसे वहां कोई था।
राहुल अब जिज्ञासु हो चुका था।
डर से ज्यादा उसे जानना था।
उस रात… उसने तय किया कि वो खुद उस पेड़ तक जाएगा।
रात को जब विकास सो रहा था।
राहुल चुपचाप बाहर निकला…
गांव में बिल्कुल सन्नाटा फैला हुआ था और रस्ते खाली थे
राहुल आगे बढ़ा पेड़ की तरफ…
और जैसे-जैसे वो पेड़ के करीब पहुंच रहा था…
हवा ठंडी होती जा रही थी।
अजीब बात ये थी—
पेड़ के पास हवा चल ही नहीं रही थी।
सब कुछ स्थिर।
जैसे वक्त रुक गया हो।
राहुल अब पेड़ के ठीक सामने था।
उसने ऊपर देखा…
पेड़ बिल्कुल शांत खड़ा था । पत्ते भी हील नहीं रहे थे…
लेकिन फिर भी एक फुसफुसाहट सी सुनाई दे रही थी।
जैसे बहुत सारे लोग धीरे-धीरे कुछ बोल रहे हों।
उसने पीछे मुड़कर देखा—
गांव गायब था।
चारों तरफ सिर्फ अंधेरा।
“ये… क्या…” उसके मुंह से निकला।
तभी…
पेड़ के तने पर कुछ हलचल हुई।
जैसे कोई उसमें से बाहर आ रहा हो।
धीरे-धीरे…
एक चेहरा उभरा।
वही… जो उसने खिड़की से देखा था।
सफेद… बिना भाव के…
और उसकी आंखें—
सीधे राहुल की आंखों में घुस रही थीं।
राहुल डर गया वह अब भागना चाहता था।
लेकिन उसके पैर…
जैसे जमीन में धंस गए थे।
वह छटपटाने लगा
बस तभी एक आवाज़ आई—
“तुम देख सकते हो…”
“क… कौन?” राहुल की आवाज़ कांप रही थी।
“बाकी नहीं देख पाते…”
पेड़ के चारों तरफ अब और भी आकृतियां दिखने लगीं…
लोग… बच्चे… बूढ़े…
सबके चेहरे खाली।
सब राहुल को देख रहे थे।
तभी राहुल के दिमाग में अचानक तस्वीरें चलने लगीं…
जैसे कोई उसकी यादों में कुछ डाल रहा हो—
वो लड़की…
वो इसी पेड़ के नीचे आई थी।
उसने भी यही आवाज़ सुनी थी।
वो भी देख सकती थी।
और फिर…
“तुम्हें चुना गया है…”
आवाज़ फिर आई।
“अब तुम भी देखोगे… हमेशा…”
राहुल की आंखें खुद-ब-खुद उस पेड़ से हट ही नहीं रही थीं।
उसकी पुतलियां फैलने लगीं…
और फिर…
धीरे-धीरे…
उसका चेहरा भी वैसा ही खाली होने लगा।
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| कुछ जगहें सिर्फ दिखाई नहीं देतीं… वो आपको अपने अंदर खींच लेती हैं। |
सुबह गांव में खबर फैली—
एक लड़का पिंपल के पेड़ के नीचे बैठा मिला।
लेकिन उसकी आंखें—
किसी को देख रही थीं।
जैसे कोई उसके पास खड़ा हो
विकास दूर खड़ा था…
उसने आंखें बंद कर लीं।
क्योंकि वो जानता था—
पेड़ ने एक और को अपना बना लिया।
वह पेड आज भी वहां खड़ा है…
और अगर कभी तुम वहां जाओ…
तो ध्यान रखना—
अगर तुम्हें कोई दिखे…
तो इसका मतलब ये नहीं कि वो सच में वहां है…
हो सकता है…
उसने तुम्हें देख लिया हो।

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