गन्ने के खेत के पास रात में एक लड़की खड़ी थी

 

Ramesh riding a motorcycle at night on a lonely rural road surrounded by tall sugarcane fields in a cinematic horror scene
देर रात सुनसान सड़क पर रमेश अपनी बाइक से घर लौट रहा था, और सड़क के दोनों तरफ गन्ने के घने खेत अंधेरे में खामोश खड़े थे।

सातारा जिले के पास पहाड़ियों के बीच एक छोटा सा गाँव था — वडगांव खुर्द।

गाँव ज्यादा बड़ा नहीं था, लेकिन आसपास की जमीन बहुत उपजाऊ थी। बरसात के बाद यहाँ के गन्ने के खेत इतने घने हो जाते थे कि सड़क के दोनों तरफ हरी दीवार जैसी दिखाई देती थी।

दिन में यह जगह बहुत सुंदर लगती थी।

लेकिन रात में…

वही खेत रहस्यमय और डरावने लगने लगते थे।

हवा चलती तो गन्ने की पत्तियाँ आपस में टकरातीं,

और उस आवाज़ में कुछ अजीब सा एहसास होता…

जैसे कोई अंधेरे में धीरे-धीरे फुसफुसा रहा हो।

उस गाँव में रमेश जाधव नाम का आदमी रहता था।

उसकी उम्र लगभग बत्तीस साल थी।

शांत स्वभाव का और मेहनती इंसान।

रमेश बाकी गाँव वालों की तरह खेती नही करता था।

वह पास के कराड MIDC में एक शुगर प्रोसेसिंग फैक्ट्री में मशीन ऑपरेटर की नौकरी करता था।

उसकी ड्यूटी कई बार रात में खत्म होती थी।

इसलिए देर रात मोटरसाइकिल से गाँव वापस आना

उसकी रोज की आदत बन गई थी।

उस रात करीब ग्यारह बजे थे।

सड़क लगभग खाली थी।

आसमान में चाँद था, लेकिन बादलों की वजह से उसकी रोशनी जमीन तक ठीक से नहीं पहुँच रही थी।

रमेश अपनी पुरानी हीरो होंडा बाइक पर धीरे-धीरे गाँव की तरफ जा रहा था।

उसकी बाइक की हेडलाइट ही उस अंधेरी सड़क को रोशन कर रही थी।

सड़क के दोनों तरफ घने गन्ने के खेत…

और बीच में एक पतली काली सड़क।

जैसे ही वह पाटिल वाड़ी के खेतों के पास पहुँचा…

उसे अचानक लगा कि सड़क के किनारे

कोई खड़ा है।

रमेश ने हल्का सा ब्रेक लगाया।

हेडलाइट की रोशनी आगे गई…

और उसे साफ दिखाई दिया।

एक छोटी लड़की।

लगभग सात-आठ साल की।

वह गन्ने के खेत के किनारे चुपचाप खड़ी थी।

उसने सफेद फ्रॉक पहना हुआ था।

उसके बाल बिखरे हुए थे…

और वह बिल्कुल स्थिर खड़ी थी।

जैसे काफी देर से वहीं खड़ी हो।

रमेश बडा हैरान हुआ।

उसने बाइक से उतरकर पूछा—

“अरे… इतनी रात को यहाँ क्या कर रही हो बेटा?”

लड़की धीरे से उसकी तरफ देखने लगी।

उसकी आँखों में कुछ अजीब सा था।

वो खाली-खाली सी लग रही थीं…

जैसे वह किसी को ढूंढ रही हो।

रमेश ने फिर पूछा—

“तुम्हारा घर कहाँ है?”

Ramesh talking to a mysterious young girl in white dress on a dark rural road with a motorcycle headlight glowing behind
सड़क के किनारे सफेद फ्रॉक पहने एक छोटी लड़की खड़ी थी, और उसकी बाइक की हेडलाइट के उजाले में रमेश उससे बात कर रहा था।

लड़की कुछ पल चुप रही।

फिर उसने धीरे से हाथ उठाकर

गन्ने के खेत के अंदर इशारा किया।

रमेश ने उस तरफ देखा।

अंदर घना अंधेरा था।

“वहाँ?” उसने पूछा।

लड़की धीरे से बोली—

“हाँ… वहीं।”

“लेकिन इतनी रात को यहाँ क्यों खड़ी हो?”

लड़की नीचे देखने लगी।

फिर उसने कहा—

“मैं… यहाँ गिर गई थी।”

रमेश ने पूछा—

“कब?”

लड़की बोली—

“दो साल पहले…”

रमेश के शरीर में सिहरन दौड़ गई।

क्योंकि उसे अचानक एक पुरानी घटना याद आ गई।

दो साल पहले…

गाँव की एक छोटी लड़की अचानक गायब हो गई थी।

पूरा गाँव उसे ढूंढ रहा था।

पुलिस भी आई थी…

गन्ने के खेत भी खोजे गए थे।

लेकिन वह लड़की कभी नहीं मिली।

उस लड़की का नाम था—

पूजा।

रमेश ने काँपती आवाज़ में पूछा—

“तुम्हारा नाम… पूजा है?”

लड़की हल्का सा मुस्कुराई।

उसकी मुस्कान अजीब थी।

जैसे बहुत समय बाद किसी ने उसे पहचान लिया हो।

“हाँ…”

वह बोली।

रमेश का गला सूख गया।

“तुम… यहाँ कैसे आई?”

लड़की धीरे से बोली—

“चलो… मैं दिखाती हूँ।”

और वह गन्ने के खेत के अंदर चलने लगी।

रमेश जैसे किसी अजीब खिंचाव में उसके पीछे चल पड़ा।

चारों तरफ ऊँचे गन्ने खड़े थे।

अंदर लगभग पूरा अंधेरा था।

सिर्फ हवा से हिलती पत्तियों की आवाज़।

कुछ कदम चलने के बाद लड़की रुक गई।

उसने जमीन की तरफ इशारा किया।

“यहीं…”

रमेश नीचे देखने लगा।

मिट्टी थोड़ी उखड़ी हुई थी…

जैसे कभी यहाँ कुछ दबाया गया हो।

रमेश ने पूछा—

“यहाँ क्या है?”

लड़की धीरे से बोली—

“मैं…”

अचानक तेज हवा चलने लगी।

गन्ने के पत्ते जोर से हिलने लगे।

रमेश ने तुरंत ऊपर देखा।

लेकिन…

Terrified Ramesh sitting inside a dark sugarcane field at night near disturbed soil in a cinematic horror moment
गन्ने के खेत के अंदर जहाँ लड़की ने इशारा किया था, वहाँ की मिट्टी उखड़ी हुई थी… और रमेश डर के मारे वहीं बैठ गया।

लड़की वहाँ नहीं थी।

चारों तरफ सिर्फ गन्ने के खेत…

और गहरा अंधेरा।

रमेश डरकर तुरंत सड़क की तरफ भागा।

सड़क पर आते ही उसने पुलिस को फोन किया।

अगली सुबह पुलिस और गाँव वाले उस जगह पहुँचे।

उन्होंने मिट्टी खोदी।

और थोड़ी ही देर में…

उन्हें एक छोटी लड़की का कंकाल मिला।

उसके पास पड़ा था—

एक पुराना सफेद फ्रॉक।

बाद में पुलिस ने पुष्टि की—

वह कंकाल पूजा का ही था।

वही लड़की जो दो साल पहले अचानक गायब हो गई थी।

आज भी वडगांव खुर्द के लोग कहते हैं—

कभी-कभी…

देर रात…

जब हवा गन्ने के खेतों से गुजरती है…

तो सड़क के किनारे

एक छोटी लड़की दिखाई देती है।

सफेद फ्रॉक में…

शांत खड़ी हुई…

जैसे वह अब भी इंतज़ार कर रही हो…

कि कोई आए…

और उसे

घर ले जाए। 👻

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें