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| सालों से बंद पड़ी यह फैक्ट्री बाहर से जितनी सुनसान दिखती है, अंदर उतना ही डर छुपा है। |
नमस्ते दोस्तों…
आपका स्वागत है Mysterious Kahaniyan ब्लॉग में,
जहाँ हम आपको डर और रहस्य से भरपूर कहानियाँ सुनाते हैं।
यहाँ हम ऐसे अनुभव साझा करते हैं
जो कभी ना कभी, किसी के साथ भी हो सकते हैं…
और शायद आपके साथ भी।
आज हम बात करने वाले हैं एक ऐसी कहानी की,
जो एक फैक्ट्री से जुड़ी है। जो सालो से बंद पड़ी है और जहां कोई आता जाता नही
सोचो कि आप कभी
ऐसी किसी सुनसान जगह के पास से गुज़रे हों
और अचानक आपका मन वहाँ रुकने से डरने लगे…
तो शायद आप समझ पाएँगे कि
क्यों कुछ जगहें वाकई सुनसान होतीं है।
आज की कहानी है राकेश देशमुख नाम के एक शख्स की।
उम्र लगभग 32 साल।
राकेश एक प्राइवेट सिक्योरिटी एजेंसी में काम करता था।
शादीशुदा नहीं था, माँ–पिता गाँव में रहते थे।
वह शहर के बाहर एक छोटे से कमरे में किराए से रहता था।
उसका रोज़ का जीवन बड़ा सीधा-सादा था—
ना ज़्यादा दोस्त, ना ज़्यादा सवाल।
शहर के बाहरी इलाके में एक पुरानी फैक्ट्री थी।
करीब 15 साल से बंद।
कभी वहाँ सैकड़ों मज़दूर काम करते थे,
लेकिन एक बड़े हादसे के बाद
अब फैक्ट्री हमेशा के लिए बंद कर दी गई।
राकेश को उस जगह के बारे में कुछ पता नहीं था।
उस की तो नई नई ड्यूटी
उस फैक्ट्री के गेट पर लगी थी।
उसका बस अपने काम पर
ध्यान था।
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| जब रात गहरी होती है, तब हर परछाई किसी खतरे का एहसास कराने लगती है। |
उस दिन…
सर्दियों की एक ठंडी रात थी।
नवंबर का महीना,
और रात की शिफ्ट उसकी पहली ड्यूटी थी
इस फैक्ट्री में।
फैक्ट्री का गेट भारी लोहे का था।
अंदर अँधेरा,
ऊपर टूटे हुए टीन की छतें,
और चारों तरफ जंग लगी मशीनें।
हवा चलते ही
अंदर से
“क्रीइइइ…” जैसी आवाज़ आती।
सब कुछ सामान्य था।
हर तरफ शांती थी
राकेश कुर्सी पर बैठा,
चाय पीते हुए,
मोबाइल देख रहा था।
कभी-कभी बिच मे
कुत्तों के भौंकने की आवाज़
दूर से आ रही थी।
रात करीब 12:40
अचानक हवा तेज़ हो गई।
पेड़ों की परछाइयाँ
फैक्ट्री की दीवारों पर हिलने लगीं।
राकेश थोड़ा असहज हो गया,
उसे लगा जैसे कोई
उसे अंदर से देख रहा हो।
उसकी गर्दन पर
हल्की सी सिहरन दौड़ गई।
फिर उसे फैक्ट्री
अंदर से हलचल सुनाई दी, उसे लगा और
“शायद चूहा होगा,”
लेकिन आवाज़
चूहे जैसी नहीं थी।
वह भारी कदमों की थी।
जैसे कोई अंदर चल रहा हो।
अचानक
फैक्ट्री के अंदर लगी
एक मशीन अपने आप
चलने लग गई।
राकेश का दिल
तेज़ी से धड़कने लगा।
उसे पसीना आ गया।
हवा अब उसे बडी
भारी लग रही थी।
उसी पल
उसे अंदर की सीढ़ियों पर
एक परछाईं दिखी।
लंबा शरीर…
झुका हुआ सिर…
और आँखों की जगह
काला गड्ढा।
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| वह सिर्फ एक पल के लिए दिखा… लेकिन डर हमेशा के लिए छोड़ गया। |
उसे देखते ही राकेश की हालत पतली हो गई,
वह भागने लगा।
लेकिन उसके पैरों में
जैसे जान ही नहीं बची थी।
पीछे से
उसे बड़ी अजीब गुर्राने की आवाज़ आई।
लाइट बंद हो गई।
चारों तरफ अंधेरा।
उसने गेट खोलने की कोशिश की,
लेकिन ताला अटक गया।
पीछे से
साँस लेने की आवाज़
बिल्कुल उसके कान के पास।
किसी तरह
वह गेट खोलकर
बाहर भागा और भागता ही रहा।
पिछे अभी भी उसे लग रहा था
की कोई उसका पिछा कर रहा है।
उसके बाद उसे कुछ पता नही
उसके बाद अस्पताल में ही उसे होश आया।
उसका शरीर ठीक था,
लेकिन दिमाग…
अब भी उस फैक्ट्री के बारे में
सोच रहा था।
उसके बाद राकेश ने वह नौकरी छोड़ दी।
उस इलाके के पास फिर
वह कभी नहीं गया।
दोस्तों,
यह कहानी तो यहीं खत्म होती है…
पर आपको क्या लगता है—
अगर फैक्ट्री सच में खाली थी
तो राकेश ने
क्या देखा था?
सो
चिए…
अगर आपके साथ भी
ऐसा कुछ हो जाए
तो आप क्या करेंगे?
कहानी कैसी लगी
नीचे कमेंट में ज़रूर बताइए।
और हाँ…
सुरक्षित रहिए। 👁️🗨️



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