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| खामोशी इतनी गहरी थी कि लगता था जैसे घर खुद कुछ छुपा रहा हो… डर की शुरुआत अक्सर शांति से ही होती है। |
नमस्ते दोस्तों…
आपका स्वागत है Mysterious Kahaniyan में,
जहाँ हम आपको डर और रहस्य से भरी वो कहानियाँ सुनाते हैं
जो सिर्फ कल्पना नहीं होतीं…
बल्कि कभी-कभी किसी की ज़िंदगी का सच भी बन जाती हैं।
आज की कहानी भी कुछ ऐसी ही है…
एक आम-सी रात और एक आम-सा घर…
लेकिन उस रात कुछ ऐसा था
जिसका एहसास बहुत देर बाद हुआ।
हम बात करने वाले हैं एक ऐसी कहानी की
जो एक परिवार के साथ घटी…
और जिसमें सबसे डरावनी बात ये थी
कि वो चीज़ घर के अंदर ही थी।
अगर आप कभी रात को अपने कमरे में अकेले लेटे हों
और आपको लगे कि कोई आपको देख रहा है…
तो ये कहानी आपको बहुत करीब से महसूस होगी।
ये कहानी है राहुल नाम के एक युवक की।
राहुल अपने माता-पिता और छोटी बहन के साथ
एक पुराने लेकिन शांत से घर में रहता था।
उनका घर शहर के पुराने हिस्से में था।
घर के पीछे एक बंद पड़ी गली,
और सामने पीपल का पुराना पेड़।
रात को जब भी हवा चलती,
तो खिड़कियाँ खुद-ब-खुद हिलने लगतीं,
मानो कोई बाहर से अंदर झाँक रहा हो।
बात उस रात की है...सब कुछ बिल्कुल सामान्य था।
खाना खाने के बाद राहुल और उसके घरवाले
अपने-अपने कमरों में सोने चले गए।
घड़ी में उस वक्त करीब 12:40 AM बज रहे थे।
घर में बिल्कुल सन्नाटा था…
सिर्फ पंखे की आवाज़ आ रही थी।
राहुल अभी तक सोया नहीं था, वह अपने कमरे में मोबाइल चला रहा था।
लाइट बंद थी, बस हल्की नीली रोशनी स्क्रीन से आ रही थी।
तभी.... राहुल को लगा
जैसे बाहर वाले कमरे से कोई हल्की सी आहट आई।
राहुल ने पहले ध्यान नहीं दिया।
उसे लगा शायद पापा उठे होंगे या माँ पानी लेने गई होंगी।
लेकिन कुछ सेकंड बाद…
वही आवाज़ फिर आई।
जैसे कोई नंगे पाँव फर्श पर चल रहा हो।
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| जब कुछ दिखाई नहीं देता, लेकिन महसूस सब होने लगता है… यही वो पल होता है जहाँ डर जन्म लेता है। |
फिर हवा अचानक ठंडी लगने लगी।
कमरे की हवा भारी सी हो गई।
दरवाज़े के नीचे से
एक परछाईं धीरे-धीरे सरकती हुई दिखने लगी।
राहुल का दिल ज़ोर से धड़कने लगा।
उसने खुद को समझाया —
“शायद लाइट का एंगल होगा… या मेरा वहम।”
लेकिन तभी…
परछाईं दो पैरों की जगह
चार हिस्सों में बँटी हुई लगने लगी।
उसके गले से आवाज़ तक नहीं निकली।
फिर अचानक बाहर से किसी ने
बहुत हल्की आवाज़ में उसका नाम लिया—
“रा…हुल…”
पूरा शरीर सुन्न पड़ गया।
पसीना पीठ से बहने लगा।
उसने चादर कसकर पकड़ ली
और आँखें बंद कर लीं।
अचानक से उसे महसूस हुआ
कि कोई उसके बिल्कुल पास खड़ा है।
उसका बदन जैसें जम सा गया
उसने डरते डरते अपनी आँखें खोली
और आँखें खोलते ही
एक झुका हुआ चेहरा उसके सामने दिखाई दिया—
चेहरे की आकृति अधूरी,
आँखें काली गहराइयों जैसी…
बस एक पल के लिए।
फिर सब अंधेरा।
राहुल चीखते हुए उठा और दरवाज़े की ओर भागा।
उसने दरवाज़ा खोलने की कोशिश की,
पर दरवाज़ा खुल ही नहीं रहा था।
मानो जम गया हो
और पीछे से साँसों की आवाज़
उसकी गर्दन के पास महसूस हो रही थी।
पूरी ताकत लगाकर उसने दरवाज़े को धक्का दिया—
दरवाजा झट से खुल गया और राहुल सीधे ड्रॉइंग रूम में गिर पड़ा।
उसके बाद डर के मारे राहुल बेहोश हो गया
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| उस पल समझ आया… डर बाहर नहीं था, वो तो बहुत पास खड़ा था। |
सुबह जब सब उठे,
तब राहुल ज़मीन पर बेसुध पड़ा था।
सब हैरान थे, उसे उठाया गया।
उठते ही राहुल बार-बार बस एक ही बात बोल रहा था—
“घर में कोई है
हमारे घर में कोई है…”
उसकी बातें किसी को समझ नहीं आ रही थी।
उसकी हालत देख उसे डाॅक्टर को दिखाया गया
डाॅक्टर ने कहा कोई डरावना सपना देखा होगा
इसलिए यह डर गया है।
पर राहुल बस एक ही बात बोलता था,
घर में कोई है.....उस रात के बाद
उसके कमरे का दरवाज़ा हमेशा बंद रहने लगा।
दोस्तों…
आज भी उस घर में रहने वाले कहते हैं
कि रात को किसी के चलने की आवाज़ आती है।
पर सबसे डरावनी बात ये है…
कि घर में रहने वालों की गिनती
हमेशा एक ज़्यादा लगती है।
सोचो अगर तुम्हारे घर में भी
कभी ऐसा महसूस हो…
तो तुम क्या करोगे?
नीचे ज़रूर बताना
और अगर कहानी पसंद आई हो
तो अगली और भी डरावनी कहानी के लिए तैयार रहना… 👁️🗨️
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