मम्मी का श्राप


फिल्मी पोस्टर शैली में मम्मी का श्राप, जिसमें विशाल मम्मी, पिरामिड और चार मुख्य पात्र दिखाई दे रहे हैं।
कुछ कब्रें इसलिए नहीं खोली जातीं क्योंकि उनके अंदर खजाना नहीं, बल्कि इंतजार होता है। क्या आप रानी नेफेरु-सा के श्राप का सामना करने के लिए तैयार हैं?



  भाग 1

भूली हुई घाटी


मिस्र की रातें अजीब होती हैं।


दिन में वही रेगिस्तान, जो दूर-दूर तक फैले सुनहरे समुद्र जैसा दिखाई देता है, रात होते ही अपना रूप बदल लेता है। हवा ठंडी हो जाती है, रेत फुसफुसाने लगती है और पुराने खंडहर ऐसे प्रतीत होते हैं मानो वे किसी का इंतजार कर रहे हों।


लक्सर के पुराने बाजार में एक कहावत आज भी सुनाई देती है—


"कुछ कब्रें इसलिए नहीं खोली जातीं क्योंकि उनके अंदर खजाना नहीं, बल्कि इंतजार होता है।"


डॉ. अन्ना मूलर ने यह बात पहली बार एक बूढ़े दुकानदार से सुनी थी।


वह मुस्कुराई और अपनी डायरी में उसे लिख लिया।


अन्ना पिछले पंद्रह वर्षों से मिस्र की प्राचीन सभ्यताओं का अध्ययन कर रही थी। उसने अनगिनत कब्रें देखी थीं, सैकड़ों शिलालेख पढ़े थे और कई ऐसी कहानियां भी सुनी थीं जिन्हें लोग श्राप का नाम देते थे।


लेकिन वह श्रापों पर विश्वास नहीं करती थी।


कम से कम, तब तक नहीं।


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तीन सप्ताह पहले, अमेरिका के बोस्टन में एक निजी नीलामी के दौरान एक पुराना चमड़े का नक्शा सामने आया था।


नक्शा अधूरा था।


उसके किनारे जले हुए थे और उस पर बने अधिकांश चिन्ह मिट चुके थे। लेकिन एक नाम अब भी साफ दिखाई देता था—


"नेफेरु-सा"


इतिहास में इस नाम की किसी रानी का कोई उल्लेख नहीं था।


यही बात डॉ. एमिली कार्टर को बेचैन कर रही थी।


"अगर इतिहास ने उसका नाम भुला दिया," एमिली ने कहा था, "तो शायद किसी ने जानबूझकर उसे भुलाया है।"


और इसी एक वाक्य ने इस अभियान को जन्म दिया।


दो हफ्ते बाद, एमिली, जेम्स और अन्ना मिस्र पहुंच चुके थे।


लक्सर हवाई अड्डे से बाहर निकलते ही उन्हें ऐसा लगा मानो वे किसी दूसरे समय में आ गए हों।


पुरानी इमारतें, बाजारों में जलते पीले लैम्प, दूर दिखाई देते मंदिर और हवा में उड़ती महीन रेत...


जेम्स ने कैमरा निकालते हुए कहा, "अगर मैं यहां मर गया, तो कम से कम मेरी आखिरी तस्वीरें शानदार होंगी।"


"तुम हमेशा मरने की बात क्यों करते हो?" एमिली ने पूछा।


"क्योंकि पुरातत्वविदों की नौकरी में दो ही चीजें मिलती हैं—पुरानी हड्डियां और खराब नींद।"


अन्ना ने हल्की मुस्कान दी।


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अगली सुबह वे अपने स्थानीय गाइड से मिले।


उसका नाम था—हसन एल-मसरी।


वह चालीस के आसपास का आदमी था। उसकी घनी मूंछें थीं, सिर पर सफेद कपड़ा बंधा रहता था और उसकी आंखों में हमेशा शरारत दिखाई देती थी।


"आप लोग वही हैं जो मरने के लिए सबसे महंगी जगह चुनकर आए हैं?" उसने उनसे मिलते ही पूछा।


जेम्स हंस पड़ा।


"और तुम वही हो जो हमें वहां ले जाने के लिए पैसे ले रहे हो?"


"बिल्कुल!" हसन ने गर्व से कहा। "मिस्र में दो चीजें कभी मुफ्त नहीं मिलतीं—पानी और राज़।"


अगले एक घंटे तक हसन उन्हें लक्सर घुमाता रहा और लगातार मजाक करता रहा।


लेकिन जैसे ही एमिली ने उसे नक्शा दिखाया, उसके चेहरे की मुस्कान धीरे-धीरे गायब हो गई।


उसने नक्शे को कुछ सेकंड तक देखा।


फिर बिना कुछ कहे उसे वापस कर दिया।


"मैं इस जगह को जानता हूं," उसने धीमी आवाज में कहा।


"तो फिर समस्या क्या है?" अन्ना ने पूछा।


हसन ने जवाब देने से पहले आसपास देखा, मानो यह सुनिश्चित कर रहा हो कि कोई सुन तो नहीं रहा।


"मेरे दादा उस घाटी के बारे में कहानियां सुनाते थे। कहते थे कि वहां एक रानी सोती है, जिसे मौत के बाद भी अकेला नहीं छोड़ा गया।"


जेम्स ने आंखें घुमाईं।


"और मुझे यकीन है कि कहानी के अंत में कोई श्राप भी होगा।"


हसन ने उसकी ओर देखा।


"नहीं।"


"नहीं?"


"क्योंकि यह कहानी कभी खत्म नहीं हुई।"


कुछ क्षणों के लिए वहां सन्नाटा छा गया।


फिर हसन अचानक हंस पड़ा।


"लेकिन अगर आप लोग मुझे पांच हजार डॉलर देंगे, तो मैं आपको वहां ले चलूंगा!"


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दो दिन बाद, वे रेगिस्तान की ओर निकल पड़े।


उनके साथ चार ऊंट, जरूरी सामान और एक स्थानीय मजदूरों की छोटी टीम भी थी।


पहले दिन की यात्रा सामान्य रही।


लेकिन दूसरे दिन से चीजें बदलने लगीं।


उनका कम्पास ठीक से काम नहीं कर रहा था।


सैटेलाइट फोन बार-बार बंद हो रहा था।


और सबसे अजीब बात...


हर सुबह उन्हें अपने शिविर के चारों ओर किसी के पैरों के निशान दिखाई देते।


"शायद कोई जानवर होगा," जेम्स ने कहा।


लेकिन अन्ना सहमत नहीं थी।


"रेगिस्तान में कोई जानवर सीधे गोल घेरा बनाकर नहीं चलता।"


तीसरी रात, हसन सामान्य से ज्यादा शांत था।


वह आग के पास बैठा हुआ था और पहली बार उसने कोई मजाक नहीं किया।


"क्या हुआ?" एमिली ने पूछा।


हसन कुछ देर चुप रहा।


"जब मैं छोटा था, मेरे दादा ने मुझसे कहा था कि अगर कभी भूली हुई घाटी जाओ और रात में कोई तुम्हारा नाम पुकारे..."


"तो?"


"पीछे मत मुड़ना।"


जेम्स मुस्कुराया।


"और अगर वह मेरा बैंक मैनेजर हुआ तो?"


इस बार हसन नहीं हंसा।


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मिस्र के लक्सर के पास भूली हुई घाटी के प्रवेश द्वार पर खड़े चार पुरातत्वविद और उनका स्थानीय गाइड।
लक्सर के रेगिस्तान में छिपी एक प्राचीन घाटी, जहां हजारों वर्षों से बंद एक कब्र अपने अगले आगंतुक का इंतजार कर रही थी।



अगली सुबह वे घाटी तक पहुंच गए।


वह जगह किसी कब्रिस्तान से ज्यादा एक घाव जैसी लग रही थी।


दो विशाल चट्टानों के बीच एक लंबा रास्ता था, जिसके अंत में रेत में आधा दबा हुआ एक प्राचीन द्वार खड़ा था।


उस द्वार को देखकर अन्ना की सांसें थम गईं।


उसने पहले भी मिस्र की कई कब्रें देखी थीं, लेकिन ऐसी नहीं।


द्वार के ऊपर उकेरी गई आकृतियां अजीब थीं।


उनमें रानी नेफेरु-सा को दिखाया गया था...


लेकिन हर चित्र में उसकी आंखें खुरचकर मिटा दी गई थीं।


"यह किसने किया होगा?" एमिली ने पूछा।


अन्ना ने सिर हिलाया।


"मुझे नहीं पता। लेकिन मिस्र में आंखें मिटाने का मतलब होता है किसी की आत्मा को इतिहास से मिटा देना।"


हसन धीरे-धीरे पीछे हटने लगा।


"मुझे यह जगह पसंद नहीं आ रही।"


"तुम तो श्रापों पर विश्वास नहीं करते थे।"


"मैं आज भी नहीं करता," हसन बोला, "लेकिन मैं उन लोगों पर विश्वास करता हूं जिन्होंने इन श्रापों को बनाने में पूरी जिंदगी लगा दी।"


तीन घंटे की मेहनत के बाद आखिरकार द्वार खोला गया।


और जैसे ही वह खुला...


घाटी में अचानक तेज हवा चलने लगी।


रेत का बवंडर उठा।


मजदूरों में से एक घुटनों के बल बैठ गया और अरबी में प्रार्थना करने लगा।


द्वार के भीतर से ठंडी हवा का झोंका बाहर आया।


हजारों वर्षों से बंद एक जगह के अंदर इतनी ठंडी हवा नहीं होनी चाहिए थी।


एमिली ने टॉर्च जलाई।


और फिर चारों अंदर चले गए।


उन्हें नहीं पता था कि उस क्षण से उनकी जिंदगी हमेशा के लिए बदल चुकी थी।


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उस रात उन्होंने कब्र के बाहर ही शिविर लगाया।


रात के लगभग तीन बजे...


एमिली की आंख अचानक खुल गई।


उसे लगा कि कोई उसके तंबू के बाहर धीरे-धीरे चल रहा है।


खर्र...


खर्र...


जैसे कोई भारी चीज रेत पर घसीटते हुए चल रही हो।


उसने अपनी घड़ी देखी।


3:07 AM.


आवाज फिर आई।


इस बार पहले से ज्यादा पास।


आधी रात को मिस्र के रेगिस्तान में तंबू के बाहर अजीब पैरों के निशान देखते हुए एक महिला पुरातत्वविद।
रात के तीन बजे, रेत पर बने पट्टियों में लिपटे पैरों के निशान और अंधेरे में गूंजती एक रहस्यमयी आवाज—"उसे बता दो... उसने मेरी अंगूठी चुरा ली है।"



एमिली ने धीरे-धीरे टॉर्च उठाई और तंबू का पर्दा हटाया।


बाहर कोई नहीं था।


लेकिन रेत पर बने निशान शिविर के चारों ओर घूमते हुए सीधे उसके तंबू तक आकर खत्म हो रहे थे।


वह झुककर उन्हें देखने लगी।


वे इंसानी पैरों के निशान नहीं थे।


वे किसी ऐसे व्यक्ति के निशान थे जिसके पैर मोटी पट्टियों में लिपटे हुए थे।


तभी...


उसके कान के बिल्कुल पास किसी महिला ने बहुत धीमी आवाज में फुसफुसाया—


"उसे बता दो... उसने मेरी अंगूठी चुरा ली है।"


एमिली का खून जम गया।


क्योंकि वह आवाज उसके पीछे से नहीं...


बल्कि उसके ठीक बगल से आई थी।



मम्मी का श्राप – भाग 2


अगला रक्षक


एमिली का पूरा शरीर सुन्न पड़ गया।


उसने तुरंत पीछे मुड़कर देखा।


वहां कोई नहीं था।


रेगिस्तान शांत था। दूर जलती आग की लपटें हवा के साथ हिल रही थीं और बाकी तंबुओं में सन्नाटा पसरा हुआ था।


लेकिन वह आवाज...


वह बिल्कुल साफ थी।


"उसे बता दो... उसने मेरी अंगूठी चुरा ली है।"


एमिली ने खुद को समझाने की कोशिश की। शायद वह थकी हुई थी। पिछले कई दिनों से वे लगातार यात्रा कर रहे थे।


लेकिन तभी उसकी नजर रेत पर पड़े उन निशानों पर गई।


वे निशान शिविर के चारों ओर घूमते हुए सीधे हसन के तंबू तक जा रहे थे।


और वहीं खत्म हो रहे थे।


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अगली सुबह, एमिली ने सबको रात की घटना बताई।


जेम्स ने पहले तो इसे नींद और तनाव का असर बताया, लेकिन अन्ना चुप रही।


वह हसन को ध्यान से देख रही थी।


उसकी आंखों के नीचे काले घेरे पड़ चुके थे।


"तुम ठीक तो हो?" उसने पूछा।


"मैंने पूरी रात नहीं सोई," हसन ने जवाब दिया।


"क्यों?"


कुछ सेकंड तक वह चुप रहा।


फिर उसने धीमी आवाज में कहा, "क्योंकि पूरी रात कोई मेरे तंबू के बाहर खड़ा रहा।"


शिविर में अचानक सन्नाटा छा गया।


"तुमने देखा उसे?" जेम्स ने पूछा।


हसन ने सिर हिलाया।


"नहीं... लेकिन मैं उसकी सांसें सुन सकता था।"


---


उस दिन वे दोबारा कब्र के अंदर गए।


कब्र पहले से कहीं ज्यादा अंधेरी लग रही थी।


जैसे दीवारों ने रात भर में और भी पुरानी यादें अपने अंदर समेट ली हों।


मुख्य कक्ष में पहुंचकर अन्ना अचानक रुक गई।


"यह असंभव है..."


"क्या हुआ?" एमिली ने पूछा।


अन्ना ने दीवार की ओर इशारा किया।


कल जहां केवल रानी नेफेरु-सा का चित्र बना हुआ था, वहां अब एक और आकृति दिखाई दे रही थी।


एक आदमी...


उसके सिर पर मिस्री रक्षकों जैसा मुकुट था।


और उसके हाथ में एक छोटी-सी अंगूठी बनी हुई थी।


चित्र के नीचे प्राचीन भाषा में एक शब्द लिखा था—


"रक्षक"


"यह कल यहां नहीं था," अन्ना बुदबुदाई।


जेम्स ने तस्वीरें खींचनी शुरू कर दीं।


"शायद हमने ध्यान नहीं दिया होगा।"


"नहीं," अन्ना ने दृढ़ स्वर में कहा। "मैंने इस पूरी दीवार की तस्वीरें ली थीं। यह चित्र यहां नहीं था।"


तभी हसन अचानक घबराकर पीछे हट गया।


उसके चेहरे का रंग उड़ चुका था।


"मुझे यहां से बाहर जाना है।"


"क्यों?"


हसन ने जवाब नहीं दिया।


उसने कांपते हुए अपनी जेब में हाथ डाला।


और एक सोने की अंगूठी बाहर निकाली।


पूरा कमरा एकदम शांत हो गया।


"तुमने यह कब ली?" एमिली लगभग चिल्ला पड़ी।


"मैं... मैं सिर्फ इसे देखना चाहता था।"


अंगूठी पर बेहद बारीक अक्षरों में कुछ लिखा हुआ था।


अन्ना ने उसे पढ़ने की कोशिश की।


उसका चेहरा सफेद पड़ गया।


"इस पर लिखा है—'जो मुझे जगाएगा, वही मेरी जगह लेगा।'"


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उसी क्षण, कब्र के अंदर कहीं दूर से खट... खट... खट... की आवाज आने लगी।


ऐसा लग रहा था जैसे कोई पत्थर पर धीरे-धीरे चल रहा हो।


आवाज पास आती गई।


खट...


खट...


खट...


फिर अचानक बंद हो गई।


कुछ पल बाद, जेम्स ने कांपती आवाज में कहा, "कृपया मुझे बताओ कि यह आवाज तुम सबने भी सुनी है।"


तभी मुख्य कक्ष के बीच रखा पत्थर का ताबूत धीरे-धीरे हिलने लगा।


सदियों पुराना उसका ढक्कन कुछ इंच खिसका।


और कमरे में एक ऐसी गंध फैल गई, जैसे किसी बंद जगह को हजारों साल बाद खोला गया हो।


हसन पीछे हटते हुए दीवार से टकरा गया।


"मैंने जानबूझकर नहीं लिया था!"


ताबूत का ढक्कन और खिसका।


अंदर अंधेरा था।


लेकिन उस अंधेरे में दो आंखें दिखाई दे रही थीं।


वे इंसानी आंखें नहीं थीं।


वे पूरी तरह काली थीं।


और वे सीधे हसन को देख रही थीं।


---


हसन चीख पड़ा और घुटनों के बल बैठ गया।


"मुझे माफ कर दो!"


अचानक उसे कुछ याद आया।


"मेरे दादा ने... उन्होंने मुझे कुछ बताया था।"


"क्या?" एमिली ने पूछा।


"उन्होंने कहा था कि रानी नेफेरु-सा को उसके दुश्मनों ने नहीं मारा था। उसने खुद को जिंदा दफना दिया था।"


"क्या?"


"उसका मानना था कि एक दिन कोई उसका विश्राम भंग करेगा। इसलिए उसने अपनी आत्मा को अपनी कब्र से बांध दिया। लेकिन... लेकिन कोई आत्मा हमेशा के लिए जाग नहीं सकती। उसे समय-समय पर आराम चाहिए।"


अन्ना की आंखें फैल गईं।


"और उस दौरान उसकी जगह कोई और लेता है।"


हसन ने सिर झुका लिया।


"रक्षक।"


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ताबूत अब पूरी तरह खुल चुका था।


लेकिन अंदर जो था, उसे देखकर सबकी सांसें थम गईं।


ताबूत खाली था।


रानी नेफेरु-सा वहां नहीं थी।


केवल सूखी पट्टियां और धूल बची थी।


तभी कमरे के दूसरे छोर से एक महिला की आवाज गूंजी—


"इतने वर्षों बाद... आखिर कोई आया।"


एमिली ने पीछे मुड़कर देखा।


कमरे के अंधेरे कोने में एक लंबी आकृति खड़ी थी।


उसका शरीर पट्टियों में लिपटा हुआ था।


लेकिन उसका चेहरा...


वह किसी ममी का नहीं, बल्कि एक जीवित महिला का लग रहा था।


उसने हसन की ओर हाथ बढ़ाया।


"मैं थक गई हूं..."


हसन की आंखों से आंसू बहने लगे।


"नहीं..."


"हर श्राप को एक उत्तराधिकारी चाहिए।"


अंगूठी अचानक हसन की उंगली में अपने आप चढ़ गई।


और उसी क्षण, उसके शरीर पर पट्टियां उभरने लगीं।


वह दर्द से चीखने लगा।


प्राचीन मिस्री कब्र के अंदर मम्मी में बदलता हुआ हसन एल-मसरी और पीछे खड़ी रानी नेफेरु-सा की आत्मा।
श्राप का एक उत्तराधिकारी होता है। रानी नेफेरु-सा की सदियों पुरानी नींद आखिरकार टूट चुकी थी, और अब उसे एक नया रक्षक मिल गया था।



एमिली और जेम्स उसे पकड़ने के लिए आगे बढ़े, लेकिन अन्ना ने उन्हें रोक दिया।


"नहीं! अब बहुत देर हो चुकी है।"


कुछ ही सेकंड में सब खत्म हो गया।


कमरे में फिर सन्नाटा छा गया।


रानी नेफेरु-सा गायब हो चुकी थी।


और जहां हसन खड़ा था...


वहां अब पट्टियों में लिपटा एक नया रक्षक खड़ा था।


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टीम किसी तरह वहां से बाहर निकलने में सफल रही।


उन्होंने कभी इस घटना के बारे में किसी को कुछ नहीं बताया।


दुनिया के लिए यह अभियान असफल रहा।


और हसन एल-मसरी इतिहास के पन्नों से गायब हो गया।


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तीन महीने बाद...


डॉ. अन्ना मूलर को जर्मनी में एक पार्सल मिला।


उसके अंदर केवल एक पुरानी तस्वीर थी।


तस्वीर उसी कब्र की थी।


इस बार ताबूत बंद था।


उसके सामने पट्टियों में लिपटा एक आदमी खड़ा था।


लेकिन सबसे डरावनी बात तस्वीर नहीं थी।


तस्वीर के पीछे हाथ से एक वाक्य लिखा गया था—


«"मैं अब समझ गया हूं कि मेरे दादा कभी उस घाटी का नाम क्यों नहीं लेते थे। और अन्ना... कृपया किसी को यहां मत आने देना। मैं बहुत थक चुका हूं।"»


नीचे एक हस्ताक्षर था।


—हसन एल-मसरी


अन्ना के हाथ कांपने लगे।


क्योंकि तस्वीर के कोने पर तारीख लिखी हुई थी।


और वह तारीख...


तीन दिन बाद की थी।



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