कमरा नं.6

शहर के बाहर सुनसान जगह पर स्थित पुराना डरावना बंगला, टूटा गेट, घास से घिरा हुआ, शाम की नारंगी रोशनी में eerie माहौल।
शांत दिखने वाला यह बंगला अपने अंदर एक ऐसा राज छुपाए बैठा था, जो किसी को वापस नहीं जाने देता।


नागपुर के बाहर, शहर से करीब 40 किलोमीटर दूर एक पुराना बंगला था…

नाम था — Shantivan Villa।

यह जगह अब बिकने वाली थी।

राहुल, 32 साल का property evaluator, पिछले 6 साल से यही काम कर रहा था — पुराने घरों की कीमत तय करना।

उसके लिए हर घर बस दीवार, प्लास्टर, लकड़ी इससे ज्यादा कुछ नहीं था।

उस दिन वो अकेला ही पहुँचा था।

बंगला बाहर से शांत था… बहुत ज्यादा शांत।

दरवाज़ा जंग लगा था, पर खुल गया।

अंदर सब कुछ वैसा ही था —

पुराना फर्नीचर, धूल, दीवारों पर फीकी तस्वीरें…

और एक अजीब बात — हर चीज़ अपनी जगह पर perfect थी।

जैसे कोई यहाँ रहता था… अभी भी।


राहुल का काम simple था —

हर कमरे की condition check करो, photos लो, report बनाओ।

लेकिन इस property में एक खास बात थी —

अगर ये deal close होती, तो उसे बड़ा commission मिलने वाला था।

उसने तय किया —

आज ही पूरा inspection खत्म करेगा।

ग्राउंड फ्लोर — 3 कमरे

पहली मंजिल — 2 कमरे

सब नोट कर लिया।

पर blueprint में एक और room marked था।

Room No. 6

पर ऊपर जाकर तो…

वहां सिर्फ दीवार थी।

राहुल ने blueprint दुबारा देखा।

कमरा साफ़ दिख रहा था —

सीढ़ियों के ठीक सामने।

पर वहां… कुछ नहीं था।

उसने दीवार पर हाथ रखा।

ठंडी थी… बाकी घर से ज्यादा ठंडी।

उसने हल्के से knock किया।

अंदर से…

घनापन महसूस हुआ।

जैसे दीवार के पीछे कुछ भरा हो।

उसने आसपास देखा।

फर्श पर हल्की-सी लाइन थी…

जैसे कभी यहाँ दरवाज़ा रहा हो।

राहुल का दिमाग अब काम से हट चुका था।

अब ये एक puzzle था उसके लिए 

उसने पूरी दीवार टटोलनी शुरू की…

एक-एक इंच।

और फिर…

एक जगह उंगली दबते ही हल्की-सी आवाज़ आई —

टक...

दीवार थोड़ी-सी अंदर धँसी…

और धीरे-धीरे एक पतली दरार खुली।

अंदर… अंधेरा।

बहुत गहरा।

पुराने घर के धूल भरे hallway में एक आदमी मोबाइल flashlight से दीवार के पीछे छिपे गुप्त कमरे को खोजते हुए। Title:
जब दीवार खुली, तब उसे एहसास हुआ कि कुछ कमरे सिर्फ दिखने के लिए नहीं होते… निगलने के लिए होते हैं।


राहुल ने मोबाइल की flashlight ऑन की।

कमरा छोटा था…

पर खाली था।

कोई खिड़की नहीं, कोई फर्नीचर नहीं।

बस बीच में…

एक पुरानी लकड़ी की कुर्सी।

और दीवार पर…

किसी ने खरोंच कर कुछ लिखा था।

शब्द साफ़ नहीं दिख रहे थे।

राहुल अंदर चला गया।

जैसे ही वो अंदर गया…

पीछे दीवार…

धीरे से बंद हो गई।

कमरे के अंदर हवा भारी थी।

राहुल ने दीवार पर लिखा पढ़ने की कोशिश की।

धीरे-धीरे शब्द साफ़ हुए —

“यहाँ जितना देर रुकोगे… उतना ....बस इतना ही था बाकी समझ नहीं आ रहा था...

उसने पलटकर देखा।

जहाँ से वो आया था…

वहां अब सिर्फ ठोस दीवार थी।

कोई दरवाज़ा नहीं।

और उसी पल…

उसे एहसास हुआ —

कमरे में वो अकेला नहीं है।


हल्की-सी आवाज़ आई…

जैसे कोई सांस ले रहा हो।

फिर…

उसकी अपनी shadow हिलने लगी।

shadow दीवार से अलग होकर…

धीरे-धीरे उसकी तरफ बढ़ने लगी।

राहुल पीछे हटने लगा।

दिल तेज़ धड़क रहा था।

जितना वो डर रहा था…

shadow उतनी साफ़ हो रही थी।

जैसे वो उसी के डर से बन रही हो।

उसने आँखें बंद कीं…

पर आवाज़ें बढ़ गईं।

किसी के कदम…

किसी की फुसफुसाहट…

किसी का हँसना…

और फिर अचानक…

उसके दिमाग में memories flash होने लगीं —

उसकी गलती, उसका गुस्सा, उसका झूठ…

सब कुछ।

जैसे कोई उसके अंदर घुसकर…

उसे खोल रहा हो।

उसका शरीर वहीं था…

पर कुछ और उससे अलग हो रहा था।

अगले दिन…

property owner को report मिली।

राहुल की तरफ से।

Report बिल्कुल perfect थी।

हर room detail में लिखा था।

Room No. 6 के बारे में भी

लिखा था —

Owner खुश था।

Deal finalize हो गई।

कुछ दिनों बाद…

नया buyer उस घर में shift हुआ।

अंधेरे कमरे में बीच में रखी लकड़ी की कुर्सी पर बैठी shadowy figure, दीवारों पर खरोंच के निशान, भयावह माहौल।
उस कमरे में कोई आवाज़ नहीं थी… सिर्फ इंतज़ार था, अगले शिकार का।


फिर एक रात…

उसे लगा… घर में एक extra room भी है।

सीढ़ियों के सामने।

जहाँ पहले सिर्फ दीवार थी।

अब वहाँ एक दरवाज़ा था।

और अंदर…

एक आदमी कुर्सी पर बैठा था।

बिल्कुल शांत।

उसकी आँखें खाली थीं।

जैसे वो वहाँ फंसा हुआ हो।

और उसके पीछे दीवार पर…

नए खरोंच बने थे —

“अब तुम अगला हो।”


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