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| एक ऐसा रास्ता जहाँ सब कुछ शांत है… पर यह सन्नाटा ही सबसे बड़ा डर है। |
गांव के बाहर, सूखी नदी के पार, एक पुराना रास्ता था…
जिस पर लोग दिन में भी कम ही जाते थे।
कहते थे—
उस रास्ते पर कोई “चलता” है…
पर उसके पैरों की आवाज नहीं आती।
कुछ साल पहले
एक आदमी वहां से गुजर रहा था।
सुबह उसका बस्स शरीर मिला—
आंखें खुली हुई… जैसे उसने कुछ देखा हो,
पर चेहरा बिल्कुल खाली।
उसके बाद से ही…
लोग उस रास्ते को “चालवा” कहने लगे।
अक्टूबर की ठंडी रात थी।
हवा में सूखापन था… और खेतों से आती हल्की सड़ी मिट्टी की गंध।
विक्रम अपनी बाइक पर उस रास्ते पर चला रहा था।
शहर से गांव की ओर जाने वाला यही छोटा रास्ता था…
बाकी रास्ता 20 किलोमीटर लंबा पड़ता था।
वह जल्दी में था।
चारों तरफ अंधेरा था…
आसपास कहीं कोई घर नहीं था…
बस सूखे पेड़, जिनकी शाखाएं हवा में हिल भी नहीं रही थीं।
सब कुछ… अजीब तरह से स्थिर था।
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| कभी-कभी डर दिखता नहीं… बस आपके साथ चलने लगता है। |
सब कुछ सामान्य था।
बस बाइक की आवाज… और उसकी सांसें।
अचानक—
उसे ऐसा लगा जैसे उसके पीछे कोई चल रहा है।
उसने रियर व्यू मिरर में देखा।
पर कुछ कुछ नहीं था।
सिर्फ खाली रास्ता था।
वह आगे बढ़ने लगा
पर कुछ सेकंड बाद—
उसे फिर वही एहसास हुआ।
इस बार…
थोड़ा और करीब।
जैसे कोई उसकी बाइक की स्पीड के बराबर चल रहा हो।
विक्रम ने बाइक की स्पीड बढ़ाई।
इंजन की आवाज तेज हुई…
पर उसके साथ-साथ…
वो “मौजूदगी” भी तेज हो गई।
अब उसे साफ महसूस हो रहा था—
कोई है वहां, उसके आसपास।
जो दिख नहीं रहा था।
हवा बडी ठंडी हो गई थी…
और अचानक।
उसके हाथों पर रोंगटे खड़े हो गए।
आगे रास्ते पर एक मोड़ था।
जैसे ही उसने मोड़ लिया—
बाइक अपने आप धीमी हो गई।
उसने एक्सेलरेटर घुमाया…
पर स्पीड नहीं बढ़ी।
इंजन चल रहा था…
पर बाइक जैसे किसी ने पकड़ ली हो।
और तभी—
उसे अपने पीछे…
किसी के बैठने का वजन महसूस हुआ।
उसकी सांस जैसे रुक सी गई।
उसने पीछे देखने की हिम्मत नहीं की।
पर उसकी गर्दन के पास…
उसे ठंडी सांस महसूस हो रही थी।
जैसे कोई बहुत करीब बैठा हो।
विक्रम के हाथ कांप गए।
उसने जोर से एक्सेलरेटर घुमाया।
बाइक झटके से आगे बढ़ी।
और पीछे का वजन…
कुछ सेकंड के लिए जैसे गायब हो गया।
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| कहानी खत्म नहीं होती… बस अपना अगला शिकार ढूंढ लेती है। |
वह बिना पीछे देखे बाइक भगाता रहा।
अब रास्ता खत्म होने वाला था…
आगे गांव की पहली लाइट दिख रही थी।
जैसे ही वह उस रोशनी के करीब पहुंचा—
अचानक सब शांत हो गया।
ना हवा…
ना वो एहसास।
सब कुछ… सामान्य।
वह रुक गया।
कुछ सेकंड…
बस सांस लेता रहा।
फिर धीरे से पीछे मुड़ा—
कुछ नहीं।
खाली सीट।
उसने गहरी सांस ली…
और बाइक स्टार्ट रखकर खड़ा रहा।
वह अपने गांव पहुंच गया।
पर उसने किसी को कुछ नहीं बताया।
बस अपने कमरे में जाकर चुपचाप बैठ गया।
पर उस रात…
डर के मारे उसे नींद नहीं आई।
हर बार जब वह आंखें बंद करता—
उसे वही एहसास होता…
कोई उसके पीछे बैठा है।
वह बच गया था पर अब डर उसके अंदर
बस गया था।
अगली रात—
उसी रास्ते पर एक और बाइक जा रही थी।
एक नया आदमी…
जल्दी में।
जैसे ही उसने मोड़ लिया—
उसकी बाइक धीमी हो गई।
और अचानक—
उसे लगा…
पीछे कोई बैठ गया है।
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