जंगल का भूत

 

भयानक जंगल में छिपा रहस्यमय भूत, अंधेरे में डरावना दृश्य"
"गहराते अंधेरे में जंगल की चीखती खामोशी और एक छिपा हुआ रहस्य..."


उत्तराखंड के घने जंगलों में एक पुराना अफवाह है कि वहाँ रात के समय किसी लड़की की चीखें सुनाई देती हैं। गांववालों का मानना है कि सालों पहले एक नवविवाहिता लड़की की मौत इसी जंगल में रहस्यमयी हालात में हुई थी। तभी से वह आत्मा भटक रही है।


पर आज का ज़माना इन बातों को कहानियाँ मानता है। एक ट्रेकिंग ग्रुप इस जंगल में घूमने आता है, और वहां शुरू होती है — एक के बाद एक, अजीब घटनाएं, सन्नाटा, परछाइयाँ, और अंत में सच्चाई जो सबके होश उड़ा देती है...


   हम चार दोस्त थे — अमित, मोना, इशान और मैं (राज)। ट्रेकिंग का शौक था हमें, और इस बार सोचा कि कहीं अलग चलते हैं। किसी ने सुझाया — जखली जंगल, जो नैनीताल के ऊपर एक वीरान रास्ते पर था।


गांववालों ने साफ मना किया —

"शाम होते ही जंगल मत जाना… वहाँ कुछ है…"

पर युवा खून, उत्साह और बेताबी… हमने हँसते हुए मना कर दिया।

हम दोपहर तक जंगल में घुसे। घना, शांत, और कहीं-कहीं डरावना सा। लेकिन सुंदर। पंछियों की आवाज़ें, ताज़ी हवा, सब कुछ अच्छा लग रहा था। शाम करीब 5 बजे अचानक जंगल का मिज़ाज बदलने लगा। हवा में ठंडक बढ़ गई… और सब खामोश हो गया।

तभी पहली चीख सुनाई दी — बहुत दूर से एक लड़की की चीख।

हम सब एक-दूसरे को देखने लगे — “तुमने सुनी?”

मोना डर गई, बोली:


“हमें लौट चलना चाहिए।”


लेकिन इशान ने कहा — "कोई घायल हो सकता है, चलो देख के आते हैं।"


हम आगे बढ़े… पेड़ और घने होते गए… और चीखें पास आती गईं।


रास्ते में हमें एक टूटा झूला मिला… उसके नीचे कुछ पुराने कंगन पड़े थे, और दीवार पर लाल रंग से लिखा था —


"मैं वापस आऊँगी..."


अब हम सब डरे हुए थे, पर कुछ हमें खींच रहा था। जैसे कोई अदृश्य ताकत।


अचानक इशान गायब हो गया। बस एक पल में।


हमने आवाज़ लगाई… इधर-उधर भागे, पर कहीं नहीं।


तभी फिर वही लड़की की चीख — इस बार इतने पास, जैसे कानों में गूंज रही हो।


एक पल के लिए मैंने देखा — एक सफेद साड़ी में औरत, अधजला चेहरा… वो पेड़ के पीछे से मुझे घूर रही थी… और फिर गायब।


हम भागने लगे। मोना गिर गई… और तभी एक औरत की परछाई ने उसे उठाया… और हल्की सी मुस्कराई… "अब तो तुमने देख ही लिया…"


हम जैसे-तैसे भाग कर गांव लौटे।


तीन दिन बाद इशान की लाश एक पेड़ से उलटी लटकी मिली — उसकी आंखें खुली थीं… जैसे किसी डर को आखिरी बार देखने के बाद जमी हों।

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🧩 कहानी का अंत (Twist):


गांव के पुजारी ने हमें बुलाया और कहा —

 “तुम लोगों ने जिस जगह रात बिताई, वो सुलोचना की जगह थी। उसे शादी के दो दिन बाद इसी जंगल में उसके पति ने मार डाला था। वो अब भी वहीं है… जो उसकी कहानी जान लेता है, वो कभी चैन से नहीं रहता…”


हम तीनों ज़िंदा तो हैं… पर जब भी रात को आंख बंद करते हैं…

सुलोचना का चेहरा दिखता है — झुलसा हुआ, पर मुस्कराता हुआ…

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